यदि आपका किसी भी निर्धारण वर्ष का आदेश पारित किया गया है तथा उसमें कोई गलती रह गई है तो आयकर कानून की धारा 154 के तहत आप उसमें सुधार करवा सकते है। यदि गलती ऐसी है जो कि रिकार्ड पर स्पष्ठ नजर आ रही है (mistake which is apparent form the record) को ही इस धारा के तहत सुधारा जा सकता है।

कौन से आर्डर को धारा 154 में सुधारा जा सकता है:-

धारा 154 के तहत निम्न धाराओं में पारित किये गये आदेशो को सुधारा जा सकता है –

(1)    आयकर कानून की किसी भी धारा में पारित किये गये आदेश

(2)    धारा 143 (1) में प्राप्त इन्टीमेशन

(3)    धारा 200A (1) में प्राप्त इन्टीमेशन (इस धारा में टीडीएस रिटर्न को प्रोसेस किया जाता है)

(4)    धारा 206CB में प्राप्त इन्टीमेशन (इस धारा में टीडीएस रिटर्न को प्रोसेस किया जाता है)

यदि गलती में सुधार के कारण करदाता का टैक्स दायित्व बढ़ जाता है या उसका रिफण्ड कम हो जाता है तो उसे सुनवाई का अवसर प्रदान करने के बाद ही भूल सुधार किया जाना चाहिए।

किसी ऑर्डर के खिलाफ अपील करने पर भूल सुधार कैसे कराये

यदि किसी आर्डर के विरुद्ध अपील प्रस्तुत कर दी गई है तो निर्धारण अधिकारी उन्ही गलतियों में सुधार कर सकता है जो अपील से संबंधित नही है। जिस मामलो में अपील की गई है उस मामले में रही गलती का सुधार अपील होने के बाद नहीं किया जा सकता है।

भूल सुधार कौन कर सकता है

किसी भी ऑर्डर में रही गलती को स्वयं निर्धारण अधिकारी स्व: विवेक से सुधार कर सकता है।  यदि गलती निर्धारण अधिकारी की पकड़ में आ जाती है तो वह स्वयं ही बिना करदाता के आवेदन किये गलती को सुधार सकता है।  लेकिन यदि गलती सुधार के कारण करदाता का कर दायित्व बढ़ रहा है या रिफण्ड कम हो रहा है तो निर्धारण अधिकारी को भूल सुधार से पूर्व करदाता को सुनवाई का समुचित अवसर प्रदान करना होगा।

इसके अतिरिक्त करदाता भी प्राप्त आदेश में सुधार के लिए धारा 154 में आवेदन कर सकता है। यदि निर्धारण अधिकारी के आदेश में गलती रही है तो उसे निर्धारण अधिकारी ठीक करेगा तथा यदि गलती कमिश्नर (अपील) के आदेश में रही है तो उस गलती का सुधार कमिश्नर (अपील) करेगा।

भूल सुधार कितने में समय में किया जा सकता है

जिस वित्तीय वर्ष में आदेश पारित किया जाता है उसकी समाप्ति से 4 वर्षो तक आदेश में रहीं गलती को सुधारा जा सकता है।  उदाहरण के लिए यदि निर्धारण वर्ष 2016 -17 का आदेश 15.3.18 को पारित किया गया है तो उस वित्तीय वर्ष 2017-18 की समाप्ति से 4 वर्ष यानि वित्तीय वर्ष 2021-22 तक ठीक किया जा सकता है।

यदि करदाता किसी आदेश में भूल सुधार के लिये आवेदन प्रस्तुत करता है तो अधिकारी को 6 माह के भीतर या तो आदेश को सुधारना होता है या आवेदन को निरस्त करना होता है

भूल सुधार के लिए आवेदन कैसे करें –

  • जिस आदेश में सुधार के लिए करदाता आवेदन प्रस्तुत करना चाहता है उसे उस आदेश को ध्यान से पढ़ना चाहिए।
  • कई बार करदाता को लगता है कि आदेश में गलती है जबकि वास्तव में गलती नहीं होती है।  करदाता की गणना में गलती हो सकती है।  कई गलतियों को CPC स्वयं ठीक कर देता है तब हमे लगता है कि गलती की गई है। उदाहरण के लिए ब्याज की गणना में गलती को सीपीसी सुधार देता है।
  • अतः जल्दबाजी में ठीक आदेश में ही भूल सुधार का आवेदन न लग जाये इस लिए आदेश को ध्यान पूर्वक पढ़ने की सलाह दी गई है।
  • यदि करदाता को लगता है कि आदेश में वास्तव में गलती है तभी उसे धारा 154 में भूल सुधार के लिए आवेदन करना चाहिए।
  • इसके साथ ही करदाता को यह देखना चाहिए कि जो गलती है वह रिकार्ड की गलती है या नहीं। यदि गलती विवादित मामले की है या जिसमें जांच की आवश्यकता है तो ऐसी गलती को धारा 154 के तहत नहीं सुधारा जा सकता है।
  • धारा 154 के तहत इनकम टैक्स पोर्टल incometaxindiaefiling.gov.in पर ओनलाईन आवदेन प्रस्तुत करना होता है।
  • धारा 200A (1) या 206CB के तहत भूल सुधार के लिए आवेदन के लिए अलग प्रोसीजर होता है।