जीएसटी के तहत लिए गये रजिस्ट्रेशन को कैसे निरस्त कराये यह काफी पेचिदा विषय है। हम यह जानते है कि रजिस्ट्रेशन को निरस्त करवाने के लिए फार्म GST REG-16 पोर्टल पर ओन-लाईन भरना होता है।  रजिस्ट्रेशन निरस्त करवाने का प्रावधान जीएसटी एक्ट की धारा 29 में किया गया है तथा नियम 20 में इस सम्बन्ध में सरक्यूलर स. 69/43/2018 दिनांक 26.10.2018  जारी किया गया है।

 

रजिस्ट्रेशन कब निरस्त करवाया जा सकता है :-

 निम्न परिस्थितियों में कोई भी व्यवहारी अपना रजिस्ट्रेशन निरस्त करवा सकता है –

  • व्यापार बंद करने पर।
  • अमालगमेशन , मर्जर , डी -मर्जर, सेल , लीज या अन्य कारणों से व्यापार का हस्तान्तरण करने पर।
  • पैन नंबर बदलने के कारण व्यापार के संविधान में परिवर्तन होने पर।
  • यदि कर योग्य व्यक्ति पर रजिस्टर्ड होने का दायित्व नहीं रहा है।
  • प्रोपराइटर की मृत्यु होने पर।
  • अन्य कोई कारण।

रूल 20 के अनुसार जिस दिन उपरोक्त कारणों से रजिस्ट्रेशन निरस्त करवाने की आवश्यकता होती है उस दिन से 30 दिन के भीतर फार्म GST REG-16 ओन लाईन पोर्टल पर भरना होता है। यदि किसी कारण से ऐसी कोई तिथि निर्धारित नहीं हो पाती है कि किस दिन रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता समाप्त हो गई है तो ऐसे मामलों में 30 दिन की अवधि को लचीले रूप से गिना जा सकता है।

 

रजिस्ट्रेशन निरस्त करवाने के आवेदन में निम्न जानकारी प्रस्तुत करनी होती है –

  • आगे पत्र व्यवहार करने के लिए पता , ई -मेल आईडी तथा मोबाइल नंबर।
  • निरस्त करवाने का कारण।
  • किस तिथी से रजिस्ट्रेशन निरस्त करवाना है।
  • इनपुट , सेमी फिनिश्ड गुड्स , फिनिश्ड गुड्स ,कैपीटल गुड्स , मशीनरी आदि के स्टॉफ का मूल्य एवं उस पर उपलब्ध इनपुट टैक्स या देय टैक्स।
  • यदि अमालगमेशन , मर्जर , डी -मर्जर के कारण व्यापार हस्तांतरित हो रहा है तो जिस फर्म में वह ट्रांस्फर हो रहा है उसका जीएसटी नंबर।
  • अंतिम फाईल की गई रिटर्न की जानकारी तथा उसका  ARN नंबर आवेदन को सफलतापूर्वक पोर्टल पर अपलोड करने के पश्चात यह संबंधित अधिकारी को प्रेषित कर दिया जाता है।

 

आवेदन प्रस्तुत करने पर हो जाता है स्वीकार :-

चूंकि रजिस्ट्रेशन निरस्त होने पर करदाता के कर दायित्व पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है अतः सम्बंधित अधिकारी इसे 30 दिन के भीतर स्वीकार कर लेते है।

निम्न मामलों में आवेदन को स्वीकार नहीं किया जाता है –

(a) यदि फार्म GST REG – 16 में प्रस्तुत आवेदन अपूर्ण भरा है।

(b) अमालगमेशन , मर्जर , डी – मर्जर के मामले में जिस फर्म में इसे ट्रांस्फर करता है उसका अभी तक रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया गया है।

उपरोक्त दो कारणों के अतिरिक्त सम्बंधित अधिकारी रजिस्ट्रेशन निरस्त का आवेदन पोर्टल पर प्राप्त होने के पश्चात तुरंत ही रजिस्ट्रेशन को निरस्त कर देगा तथा इस सम्बन्ध में आदेश फार्म GST REG-19 में जारी कर देगा।  रजिस्ट्रेशन उसी तारीख से निरस्त किया जायेगा जो तारीख फार्म GST REG – 16 में व्यवहारी ने दी है। आवेदन की तिथी से रजिस्ट्रेशन किसी भी हाल में निरस्त नहीं किया जा सकता है।

 

आवेदन निरस्त होने पर क्या करें :-

यदि उपरोक्त दो कारणों से आवेदन निरस्त हो जाता है तो सम्बंधित अधिकारी करदाता को 7 दिन में कमी को ठीक करने के लिए लिखित में सूचना देगा।

यदि करदाता कमी को ठीक नहीं करता है तो सम्बंधित अधिकारी आवेदन को पोर्टल पर निरस्त कर देगा तथा निरस्त करने के कारण भी वहां दिखा देगा।

 

रजिस्ट्रेशन निरस्त का आदेश प्राप्त होने के पश्चात क्या करें :-

next-steps

रजिस्ट्रेशन निरस्त होने का आदेश प्राप्त होने के 3 माह के भीतर व्यवहारी को GSTR-10 फार्म में एक फाईनल रिटर्न प्रस्तुत करनी होती है।  यह रिटर्न इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर , नॉन रेजीडेंट टैक्सेबल पर्सन , कम्पोजीशन स्कीम का लाभ लेने वाले व्यवहारी , धारा 51 या धारा 52 में रजिस्टर्ड व्यवहारियों को प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं है।  इस रिटर्न को प्रस्तुत करने का उद्देश्य यह है कि करदाता का जो कर दायित्व धारा 29(5) के तहत बनता है उसका वह भुगतान करें।

 

स्टॉफ पर देय कर का भुगतान :-

धारा 29(5) एवं रूल 20 के अनुसार रेजिस्ट्रेशन निरस्त करवाने के मामले में करदाता अंतिम स्टॉफ पर देय कर का भुगतान क्रेडिट लेजर या कैश लेजर से करेगा।

फाईनल रिटर्न भरने के परिणाम :-

यदि व्यवहारी निर्धारित अवधि में GSTR -10  फार्म प्रस्तुत नहीं करता है तो उसे फार्म GSTR -3A में नोटिस जारी किया जायेगा।  यदि नोटिस मिलने के 15 दिन के भीतर फाईनल रिटर्न प्रस्तुत नहीं की जाती है तो धारा 62 के तहत फार्म GST ASMT-13 में निर्धारण आदेश पारित कर दिया जायेगा।  इस आदेश के पारित होने के 30 दिन के भीतर भी यदि व्यवहारी फाईनल रिटर्न प्रस्तुत कर देता है तो यह निर्धारण आदेश निरस्त मान लिया जायेगा। हालांकि व्यवहारी पर ब्याज एवं लेट फीस चुकाने का दायित्व बना रहेगा।

सभी पेन्डिग रिटर्न आवश्यक :-

यदी व्यवहारी धारा 39 के तहत GSTR- 1, GSTR-3B एवं GSTR-4 प्रस्तुत नहीं करता है, धारा 44 के तहत GSTR-9 , GSTR-9A एवं GSTR-9C प्रस्तुत नहीं करता है , धारा 45 के तहत GSTR- 10  प्रस्तुत नहीं करता है या टीडीएस/टीसीएस की रिटर्न प्रस्तुत नहीं करता है तो उसे रूल 68 के तहत नोटिस जारी किया जायेगा।  यदि किसी व्यवहारी ने रजिस्ट्रेशन की तिथी से रजिस्ट्रेशन निरस्त करवाने की तिथी तक कोई लेनदेन नहीं किया है तो वह  इस सम्बन्ध में अन्डरटेकिंग देकर रिटर्न भरने से छूट प्राप्त कर सकता है।

जीएसटीआर – 10 भरना आवश्यक :-

रजिस्ट्रेशन निरस्त करने का आवेदन प्रस्तुत करने का आवेदन प्रस्तुत करने के पश्चात निर्धारित अवधि में GSTR- 10 फार्म भरना आवश्यक है।  कुछ लोग पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन निरस्त देख कर यह मान लेते है कि उनका रजिस्ट्रेशन निरस्त हो चुका है अब कोई कार्यवाही करने की आवश्यकता नहीं है जो कि सही नहीं है।

निष्कर्ष

रजिस्ट्रेशन निरस्त करवाने वाले व्यवहारी इस बात का विशेष ध्यान रखे कि GST REG – 16 भरने एवं GST REG – 19 में निरस्त होने का आदेश प्राप्त होना ही पर्याप्त नहीं है।  GSTR – 10 जब तक आप प्रस्तुत नहीं करेंगे रजिस्ट्रेशन निरस्त नहीं होगा।